पुष्कर राजस्थान का वो शहर जो एक साथ कई चीज़ें है। एक पवित्र तीर्थ जहाँ ब्रह्मा जी का दुनिया में इकलौता प्रमुख मंदिर है। एक झील जिसके 52 घाट हैं और जिसे पुराणों में सर्वतीर्थ कहा गया है। एक बाज़ार जहाँ ऊँटों और घोड़ों की नीलामी होती है। और नवंबर में एक ऐसा मेला जिसे देखकर यकीन नहीं होता कि यह असली है।
मैं पुष्कर कई बार गया हूँ। गर्मियों में जब सिर्फ स्थानीय लोग दिखते हैं, और नवंबर में जब पूरी दुनिया के पर्यटक आते हैं। दोनों अनुभव अलग हैं दोनों अपनी जगह खास हैं।
पुष्कर की पहचान क्या बनाता है इसे खास?
पुष्कर की असली पहचान तीन चीज़ों से है:
- पुष्कर झील और 52 घाट हिंदू धर्म में अति पवित्र। कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ स्नान का विशेष महत्व।
- ब्रह्मा मंदिर पूरे विश्व में ब्रह्मा जी के गिने-चुने मंदिर हैं, जिनमें यह सबसे प्रमुख और प्राचीन है।
- पुष्कर मेला नवंबर में लगने वाला विश्वप्रसिद्ध ऊँट और पशु मेला।
पुष्कर झील 52 घाट और आस्था का केंद्र
पुष्कर झील छोटी है लेकिन महत्व में बड़ी है। इसके किनारे 52 घाट बने हुए हैं हर घाट का नाम और इतिहास अलग है। सबसे प्रसिद्ध हैं ब्रह्म घाट, गऊ घाट, और वराह घाट।
कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर) पर यहाँ स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है यह मान्यता सदियों से चली आ रही है। इसीलिए उस दिन लाखों लोग यहाँ आते हैं।
ब्रह्मा मंदिर पूरी दुनिया में इकलौता
पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर 14वीं शताब्दी में बना था, हालाँकि इस स्थान पर मंदिर बहुत पहले से था। मंदिर सफेद संगमरमर का बना है जिस पर चाँदी का काम है। ऊपर लाल रंग का शिखर है जो दूर से दिखता है।
अंदर ब्रह्मा जी की चतुर्मुखी मूर्ति है। पास में उनकी पत्नी गायत्री देवी का भी स्थान है।
मंदिर का समय: सुबह 6:30 से दोपहर 1:30 बजे तक, और शाम 3 बजे से रात 9 बजे तक। प्रवेश नि:शुल्क, पर जूते बाहर उतारने होंगे।
सावित्री मंदिर ऊँचाई से पुष्कर का नज़ारा
पुष्कर झील के पीछे एक पहाड़ी है जिस पर सावित्री माता का मंदिर है। यहाँ जाने के दो रास्ते हैं:
- रोपवे: नई रोपवे सेवा शुरू हो गई है ₹100-150 में। 5 मिनट में ऊपर। परिवार के साथ और बुज़ुर्गों के लिए यही बेहतर है।
- पैदल: करीब 45 मिनट की चढ़ाई। सुबह जल्दी करें तो गर्मी नहीं लगेगी और सूर्योदय का नज़ारा मिलेगा।
ऊपर से पुष्कर का पूरा दृश्य दिखता है झील, मंदिर, रेगिस्तान, और अरावली। यह दृश्य पुष्कर की सबसे अच्छी फोटो के लिए है।
पुष्कर मेला नवंबर का जादू
पुष्कर मेला या पुष्कर कैमल फेयर हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर लगता है। यह मेला 5-7 दिन चलता है। दुनिया के सबसे बड़े ऊँट और पशु मेलों में से एक।
यहाँ क्या होता है:
- हज़ारों ऊँट, घोड़े, और मवेशियों की खरीद-बिक्री
- ऊँट सजाने की प्रतियोगिताएँ
- घुड़दौड़ और ऊँट दौड़
- राजस्थानी लोक संगीत और नृत्य
- कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र स्नान
पुष्कर बाज़ार क्या खरीदें?
पुष्कर का बाज़ार रंगीन और चहल-पहल वाला है। यहाँ मिलता है:
- पुष्कर के गुलाब: यहाँ के गुलाब पूरे राजस्थान में मशहूर हैं। गुलाब जल और गुलाब का इत्र ले जाएँ।
- राजस्थानी कपड़े और बंधेज: रंगीन बंधेज और लहरिया के कपड़े।
- चाँदी के गहने: यहाँ के सिल्वर ज्वेलरी की दुकानें अच्छी हैं।
- माला और पूजा सामग्री: रुद्राक्ष, तुलसी माला, और पूजन सामग्री।
बाज़ार में मोल-तोल आम बात है। शुरुआती कीमत से 30-40% कम पर खरीद सकते हैं।
पुष्कर में केवल शाकाहारी खाना मिलता है। मलाई लस्सी और दाल-बाटी ज़रूर खाएँ।
घाट पर स्थानीय लोगों की फोटो लेने से पहले पूछें। कुछ लोगों को पसंद नहीं होता।
पुष्कर छोटा है घाट रोड से ब्रह्मा मंदिर तक पैदल ही सब देख सकते हैं।
कैसे पहुँचें?
सिर्फ 14 किमी ऑटो ₹200-300 या बस ₹30-40। 30-40 मिनट।
145 किमी बस या टैक्सी से करीब 2.5-3 घंटे।
ट्रेन से अजमेर तक, फिर ऑटो। या सीधी बस भी चलती है।
शहर छोटा है घाट रोड पर पार्किंग करके पैदल घूमें। ई-रिक्शा भी मिलते हैं।
कब जाएँ?
सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्च। मौसम ठंडा और सुहाना रहता है।
नवंबर: पुष्कर मेले का समय भीड़ बहुत होती है पर अनुभव अविस्मरणीय। पहले से बुकिंग ज़रूरी।
गर्मियाँ (अप्रैल-जून): तापमान 40°C+ तक जाता है। घाट पर जल्दी सुबह या शाम को ही जाएँ।
आसपास क्या देखें?
- अजमेर शरीफ दरगाह 14 किमी। ख्वाजा साहब की दरगाह पुष्कर के साथ एक ही दिन में दोनों देखे जा सकते हैं।
- अजमेर दरगाह गाइड (हिंदी) दरगाह जाने से पहले हमारी हिंदी गाइड पढ़ें।
- आना सागर झील, अजमेर अजमेर शहर की खूबसूरत झील जहाँ शाम को सुकून मिलता है।
- नारेली जैन मंदिर अजमेर के पास अरावली की तलहटी में बना भव्य जैन मंदिर।
व्यक्तिगत अनुभव
शाम की आरती के समय घाट पर खड़े होना, पानी पर तैरते दीये और आखिरी रोशनी में चमकता ब्रह्मा मंदिर का शिखर यही वो पल है जो अजमेर से 14 किमी के इस चक्कर को बाकी दिन चाहे जैसा भी रहे, लायक बना देता है।
कितना खर्चा हुआ
- अजमेर से बस/शेयर्ड ऑटो: ₹30-40 एक तरफ (प्राइवेट ऑटो ₹200-300)
- ब्रह्मा मंदिर: प्रवेश मुफ्त
- सावित्री मंदिर रोपवे: ₹100-150 आने-जाने का
- गुलाब उत्पाद/स्मृति चिन्ह: ₹100-500 खरीदारी के अनुसार
- भोजन (शाकाहारी थाली): ₹150-250
- खरीदारी छोड़कर एक दिन की यात्रा का सामान्य बजट: ₹400-700
पार्किंग का अनुभव
घाट रोड के बाहर पैदल वाले मुख्य इलाके से पहले पार्क करें और अंदर पैदल जाएँ। बाज़ार और घाट की गलियों में गाड़ियाँ नहीं जातीं, इसलिए झील के बिल्कुल पास कोई पार्किंग नहीं है।
भीड़ का समय
नवंबर में पुष्कर मेले के दौरान सबसे ज़्यादा भीड़ रहती है। सामान्य सप्ताहांत और कार्तिक पूर्णिमा पर भी भीड़ रहती है। त्योहार के मौसम के अलावा सप्ताह के दिनों की सुबहें शांत रहती हैं।
क्या अवॉइड करें
घाट के पास चमड़े की चीज़ें न ले जाएँ। शहर में कहीं भी शराब या मांसाहारी खाने की उम्मीद न रखें। बिना दाम पूछे "पूजा" के लिए हाँ न करें कुछ पंडे पर्यटकों से ज़्यादा वसूलते हैं। बिना अनुमति नहाते श्रद्धालुओं की फोटो न लें।
छुपे हुए स्पॉट
ब्रह्म घाट से हटकर कम इस्तेमाल होने वाले घाट (सुबह जल्दी गऊ घाट आज़माएँ) बैठने और सूर्योदय देखने के लिए शांत हैं। शहर के बाहर पहाड़ियों पर वसंत के गुलाब के खेत पर्यटकों को शायद ही कभी दिखते हैं।
लोकल फूड
बाज़ार के आसपास छोटी शाकाहारी दुकानों पर मलाई लस्सी और दाल-बाटी-चूरमा ज़रूर लें। पुष्कर की गुलाब-स्वाद वाली मिठाइयाँ भी आज़माने लायक हैं।
परिवार के लिए उपयुक्त?
बहुत संभालने लायक समतल शहर, सावित्री मंदिर की वैकल्पिक चढ़ाई (जिसका रोपवे विकल्प भी है) को छोड़कर कोई खड़ी चढ़ाई नहीं, और झील के घाट बच्चों व बुज़ुर्गों दोनों के लिए शांत हैं।
फोटोग्राफी पॉइंट्स
पृष्ठभूमि में ब्रह्मा मंदिर के शिखर के साथ घाटों पर सूर्योदय या सूर्यास्त, सावित्री मंदिर की पहाड़ी से पूरे शहर और झील का नज़ारा, और बाज़ार की रंगीन कपड़ों की दुकानें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पूरे विश्व में ब्रह्मा जी के मंदिर बहुत कम हैं पुष्कर वाला सबसे प्राचीन और प्रमुख माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहीं ब्रह्मा जी ने यज्ञ किया था, जिससे यह झील और नगर बने।
हर साल कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर के अंत या नवंबर में) पर। 5-7 दिन चलता है। यह दुनिया के सबसे बड़े ऊँट मेलों में गिना जाता है।
नहीं। पुष्कर में मांस, मछली, अंडे और शराब पर पूर्ण प्रतिबंध है। यह नियम होटलों सहित पूरे शहर में लागू है। केवल शाकाहारी भोजन मिलता है।
सिर्फ 14 किमी। ऑटो या टैक्सी से 30-40 मिनट। पुष्कर को अजमेर दरगाह के साथ एक ही दिन में किया जा सकता है।
सुबह ब्रह्मा मंदिर, फिर घाट पर समय बिताएँ, दोपहर में बाज़ार, शाम को सावित्री मंदिर (रोपवे से) और सूर्यास्त का नज़ारा। एक दिन में ये सब हो जाता है।